गांधी ने राजनीति को कभी सत्ता का खेल नहीं माना। उनके लिए उसका धर्म सेवा, उसका आधार नैतिकता और उसका लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति का कल्याण था। पराग मांदले का यह विचारोत्तेजक निबंध गांधी की राजनीतिक दृष्टि को उनके अपने शब्दों में समझते हुए आज की राजनीति के सामने एक असहज लेकिन जरूरी प्रश्न खड़ा करता है: क्या हम गांधी की अपेक्षाओं के अनुरूप राजनीति रच पाए हैं?





